प्र : क्लोजापिन क्या है ?

Ø   क्लोजापिन एक पुराने प्रकार का मगर अत्यंत प्रभावशाली एंटीसाईकोटिक दवा है. मनोविकार (साईकोसिस) के इलाज में क्लोजापिन को अन्य एंटीसाईकोटिक दवाओं से बेहतर माना जाता है. लेकिन इसमें खुन की नियमित जाँच करानी पड़ती है.


प्र : क्लोजापिन के ईलाज में क्या खतरा है ?

Ø  सका मुख्य साइड-इफेक्ट है; ये शरीर में सफेद रक्त कणों (WBC) को कम करता है. सफेद रक्त कण हमें संक्रमण (इन्फेक्शन) से बचाते हैं. इनकी संख्या कम होने से विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. गंभीर इन्फेक्शन होने से व्यक्ति की जान  भी जा सकती है.

ये अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि किन लोगों में ये साइड-इफेक्ट होगा. इसीलिए इसके ईलाज में WBC की जाँच नियमित समय पर कराना जरूरी हो जाता है.


प्र : क्लोजापिन में और कौन-कौन से साइड-इफेक्ट है ?

Ø  अन्य एंटीसाईकोटिक की भांति इसमें भी कुछ कॉमन साइड-इफेक्ट होते हैं जैसे की अधिक नींद आना, वजन बढ़ना, ब्लड-सूगर में वृद्धि....

    कुछ लोगों में अधिक लार का आना भी देखा गया है.

    कुछ लोगों में ये हृदय पर भी असर डाल सकता है.


 प्र : इसमें इतने सारे साइड-इफेक्ट हैं फिर भी इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

Ø  क्योंकि इसे सबसे प्रभावशाली एंटी-साईकोटिक माना जाता है.

 

प्र : क्लोजापिन का उपयोग किन-किन रोगियों में किया जाता है ?

१. साइकोसिस (स्किजोफ्रेनिया) के ऐसे केस जिसमें अन्य एंटीसाईकोटिक प्रभावशाली नहीं    होते.

२. मूड विकार में जब अन्य दवाएँ असर नहीं करती.

३. व्यक्तित्व विकार में गुस्सा, आवेग और आत्मघात/आत्महत्या की प्रवृति को कम करने के लिए.


प्र  : हम किस प्रकार इससे होने वाले साइड-इफेक्ट को कम कर सकते हैं?

Ø  सबसे आसान तरीका है मरीज की रक्त जाँच करना.  

दवा शुरू करने से पहले : रक्त-कणों की पूरी जाँच, इ.सी.जी., लीवर की जाँच, आदि ...

दवा लेने के दौरान : पहले ४ महीने तक - हर सप्ताह खून की जाँच,

                 उसके बाद एक साल तक - हर दो सप्ताह में,

                  उसके बाद – महीने में एक बार


प्र : मेरा भाई सुई पसंद नहीं करता. क्या उसे क्लोजापिन दिया जा सकता है?

Ø  जी नहीं, बिना खून जाँच कराये इसे देना बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है.  बिना खून जाँच कराये डॉक्टरों द्वारा इसे लिखना अनैतिक है.