प्र : हम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के सम्बन्ध में लैंगिक इच्छाओं की बात क्यों कर रहे हैं?
>हमलोग यहाँ पर लैंगिक इच्छाओं की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में लैंगिक भावनाओं में परिवर्तन (साधारणतः कमी) होता है.

>उदाहरण के लिए, अवसाद में लोगों की लैंगिक इच्छाओं में कमी होना एक सामान्य शिकायत है.

प्र : क्या अवसाद जैसी मानसिक अवस्थाओं में ही लैंगिक इच्छाओं में कमी देखी गयी है? तो क्या वो लोग जिन्हें सेक्स में रूचि नहीं होती है, अवसाद से ग्रसित होते हैं? 
>ये कोई जरूरी नहीं है. इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं.
: सामान्य कारण जैसे- वृद्धावस्था, हर दिन थका होना, अपने पार्टनर के लिए आकर्षण नहीं होना, शादि के लंबे समय बाद आदि
: व्यक्तिगत कारण जैसे अध्यात्मिक और धार्मिक अभ्यास 
: शारीरिक कारण जैसे होर्मोनल समस्याएँ 

प्र : मैंने सुना है मानसिक दवाएँ लेने से सेक्स में रूचि कम हो जाती है, क्या ये बात सही है?
>जी, ये बात कुछ हद तक सही है. 

>अवसाद-प्रतिरोधक दवाएँ (जैसे एस.एस.आर.आय.) सेक्स लाइफ में समस्याएँ पैदा कर सकती है. समय के साथ ये शिकायतें कम हो सकती है या इनका ईलाज भी संभव है. अच्छी बात ये है कि कुछ अवसाद-प्रतिरोधक दवाओं में ये दुष्प्रभाव नहीं होता है.

प्र : क्या कुछ ऐसी भी मानसिक समस्याएँ है जिसमें लैंगिक भावनाएँ ज्यादा हो सकती है?
>जी हाँ, कुछ ऐसी मानसिक अवस्थाएँ है जिसमें ऐसा हो सकता है.

>एक है : उन्माद (मेनिया/हाइपोमेनिया), द्विध्रूवी विकार के इस अवस्था में उच्च मनोदशा के साथ लैंगिक इच्छाएँ बढ़ जाती है.

>दिमागी चोट से उत्पन्न कुछ मानसिक अवस्थाओं (क्लुवर-बुसी सिंड्रोम) और फ्रोंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया में भी लैंगिक इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रहता है.