नींद की कमी (अनिद्रा)

प्र : नींद की कमी एक लक्षण है या एक बीमारी ?

Ø  ये दोनों प्रकार की अवस्था हो सकती है.


प्र : क्या आप स्पष्ट करेंगे की ये एक लक्षण कैसे है ?

Ø  नींद की कमी होना कई मानसिक बिमारियों का एक लक्षण हो सकता है ?

उदाहरण के लिए,

Ø  अवसाद में आमतौर पर नींद की परेशानी होती है क्योंकि वे उदासीन बातों और अन्य कारणों के बारे में सोचते रहते हैं.

Ø  उन्माद में दिमाग इतना सक्रिय रहता है की वो सो नहीं सकते, बल्कि उन्हें नींद की जरूरत ही कम पड़ती है.

Ø  पारनॉएड स्किजोफ्रेनिया में संदेह ही वजह से नींद आने में परेशानी होती है.

Ø  ओ.सी.डी. में नींद आने में दिक्कत हो सकती है क्योंकि वे बार-बार जाँच करना चाहते हैं की दरवाजा बंद है या नहीं.

Ø  डिमेंशिया (स्मृतिलोप) के शिकार लोगों में नींद की परेशानी हो सकती है.

Ø  डेलीरियम की अवस्था में व्यक्ति सो नहीं पाता.

Ø  ऊपर बतायी हुई अवस्थाओं में दूसरे कारणों (रोगों) की वजह से नींद में कमी (परेशानी) की स्तिथि आती है, इसलिए इसे गौण अनिद्रा कहा जाता है.


प्र : क्या आप बताएँगे की अनिद्रा एक बीमारी कैसे है ?

Ø  कुछ लोगों में कोई शारीरिक या मानसिक बीमारी नहीं होती फिर भी उन्हें नींद की परेशानी रहती है. ऐसे में अनिद्रा अपने आप में एक बीमारी माना जाता है.


प्र : क्या शारीरिक बिमारियों में भी नींद की परेशानी हो सकती है ?

Ø  जी हाँ बिल्कुल.

Ø  उदाहरण के लिए, श्वांस-रोग (जैसे-दमा) में व्यक्ति को अच्छी और पर्याप्त नींद आने में परेशानी हो सकती है. हाइपरथाईरोडिज्म में भी व्यक्ति ठीक से सो नहीं पाता. वैसे बच्चे भी ठीक से नहीं सो पाते जिन्हें विस्तर गीला करने की समस्या होती है. प्रोस्टेट की बीमारी वाले बुजुर्गों को भी रात में बार-बार पेशाब करने के लिए जागने के कारण सोने में दिक्कत आती है.


प्र : हम ये कैसे पता लगा सकते हैं की नींद में परेशानी शारीरिक या मानसिक कारणों से हो रही है ?

Ø  आप किस वजह से ठीक से नहीं सो रहे हैं इसका कारण पता करने के लिए आपको पहले फिजिसियन से मिलना चाहिए. यदि कोई शारीरिक कारण नहीं मिलता है तो आपको मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए.