कम दोस्त होना (समाज से दूर रहना या संकोची होना या अंतर्मुखी होना या .....)

#   क्या अवसाद की वजह से दोस्त कम हो जाते हैं ? क्या अवसाद के शिकार लोगों के कोई दोस्त नहीं रहते ?

Ø  अवसाद में आदमी अकेला रहना पसंद करता है और अपनी परेशानी या उदासी के बारे में सोचता रहता है. ऐसे लोग दूसरों से दोस्ती करने में दिलचस्पी नहीं रखते बल्कि पुराने दोस्तों से भी उनका सम्पर्क टूट जाता है.


# व्यक्ति के अकेले रहने और एकांत पसंद करने में क्या गलत है?

Ø  समें गलत तो कुछ भी नहीं है, पर परेशानी तब आती है जब आप इतने ज्यादा एकांतप्रिय हो जाते हैं की आपका लोगों से सम्बन्ध और काम-काज प्रभावित होने लगता है. जिससे आपके परिवारवालों को आपकी चिंता होने लगती है.


# और किन-किन परिस्थितियों में दोस्तों की कमी और समाज से अलगाव देखने को मिलता है?

Ø  कभी-कभी साईकोसिस/स्किजोफ्रेनिया में व्यक्ति किसी के ऊपर विश्वास नहीं करता है, इस वजह से वह लोगों से सम्पर्क नहीं रखना चाहता.

Ø  कुछ खास प्रकार के व्यक्तित्व के लोग भी ज्यदा दोस्त बनाना और लोगों से घुलना-मिलना पसंद नहीं करते. ये ऐसे लोगों के लिए सामान्य बात है और यह कोई बीमारी का लक्षण नहीं है.


# एक तरफ आप कहते हैं की ये मानसिक रोग का लक्षण हो सकता है और दूसरी तरफ आप कहते हैं की ये बिलकुल सामान्य बात है. फिर दोनों में कैसे अंतर कर सकते हैं?

Ø  सबसे महत्वपूर्ण बात ये जानना है कि क्या ये स्वभाव उस व्यक्ति के लिए नया है? यदि उस व्यक्ति का स्वभाव शुरू से ही ऐसा रहा है, तो ये शायद मानसिक समस्या नहीं है. लेकिन यदि उस व्यक्ति के स्वभाव में कोई परिवर्तन आया है जो उसके सामान्य स्वभाव से अलग है तो हमें देखना होगा कि कुछ समस्या तो नहीं है.

Ø  ऐसी परिस्थितियों को हल करने में फिर मनोचिकित्सक की भूमिका होती है.