एंटी सायकोटिक क्या होता है?

एंटी सायकोटिक वो दवाइयाँ होती है जिसका उपयोग मनोदुर्दशा (साईकोसिस) और मनोदुर्दशा की  अन्य समस्याओं के ईलाज में किया जाता है


क्या एंटी सायकोटिक दवाईयों के दुष्प्रभाव होते हैं?
जी हाँ, जिंदगी बचानेवाली एस्पिरिन से लेकर अन्य दवाईयों की तरह इनमें भी दुष्प्रभाव होते हैं। एस्पिरिन के जैसे ही हमें नुकसान और फायदों का संतुलन करना चाहिए और बाद में एंटी सायकोटिक लेना चाहिए या नहीं ये तय करना चाहिए। अनुसंधान कहता है कि नुकसान की तुलना में फायदे ज्यादा हैं। 

एंटी सायकोटिक दवाईयों के क्या-क्या दुष्प्रभाव है ?
मुख्य बात यह है कि ये सभी दुष्प्रभाव हर एक को नहीं होते हैं।

और ये बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि डॉक्टर के लिए ये बताना भी संभव नहीं होता कि कौन सा दुष्प्रभाव किसे होगा और कितना गंभीर होगा

निम्नलिखित कुछ महत्त्वपूर्ण दुष्प्रभाव : 

एलर्जिक प्रतिक्रिया - अन्य दवाईयों की तरह इसमें भी ये अंदाज़ लगाना संभव नहीं होता की किन लोगों में ये प्रतिक्रिया होगी इसीलिए आरंभ में कम डोज से ईलाज शुरू किया जाता है

अधिक नींद आना- इसकी वजह से ये दवाईयाँ रात में लेना और नींद रही है तो गाड़ी ना चलाना बेहतर होगा।

वजन का बढ़ना / मोटापा- कुछ दवाईयों से किलों तक वजन बढ़ सकता है और इसलिए खाने पे नियंत्रण और व्यायाम की जरूरत होती है। 

कोलेस्ट्रोल में वृद्धि- इसे नियंत्रण में रखने से भविष्य में हृदय की समस्याएँ कम की जा सकती है।   

ब्लड सुगर में वृद्धि- एंटी सायकोटिक दवाईयों की शुरुआत करने के बाद ब्लड शुगर में वृद्धि हो सकती है और जरूरत पड़ने पर ईलाज करवाना चाहिए। 

रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में वृद्धि / कमी- इस पर ध्यान रखना चाहिए और जरूरत पड़े तो ईलाज करवाना चाहिए। 

प्रोलैक्टिन हार्मोन में वृद्धिये हड्डियों पर और लैंगिक कार्यों पर प्रभाव डालता है।  स्तनों का बढ़ना (पुरुषों में भी), स्तनों से दूध निकल आना (पुरुषों में भी), मासिक धर्म से जुडी समस्याएँ इत्यादि। इसलिए नियमित रूप से जांच होना और जरूरत होने पर ईलाज होना चाहिए। 

लैंगिक (सेक्सुअल) दुष्प्रभाव - कुछ दवाईयों से मैथुन (सेक्स) में रूचि और कार्यों में बदलाव सकता है। इसपर ध्यान देना और जरूरत पड़े तो ईलाज करना चाहिए। 

हृदय, गुर्दे और लीवर पर प्रभाव पड सकता है। इसलिए से महीनों में जांच करने की जरूरत होती है। 


क्या एंटी सायकोटिक के अलग-अलग वर्ग / प्रकार हैं?  
एंटी डिप्रेसेंट्स की तरह एंटी सायकोटिक के भी "पुराने ज़माने की और नए ज़माने की " ऐसे प्रकार / वर्ग है।  पुराने ज़माने की दवाइयाँ भी नए ज़माने की दवाईयों जितनी ही प्रभावी होती है, सिवाय इसके कि ये सच है कि इससे अपरिवर्तनीय दुष्प्रभाव होने की संभावना ज्यादा होती है।   

मैं नियमित रूप से दवाईयाँ लेना भूल जाती हूँ।

ठीक है, तो फिर आप खाने वाली दवा के बदले इंजेक्शन लगवा सकती है।   

अगर आप ने इंजेक्शन लेना तय किया तो आपको हर एक महीने में / सप्ताहों में / सप्ताहों में / सप्ताह में एक इंजेक्षन लेना जरूरी है।


अगर मैंने इंजेक्शन लिया तो क्या मुझे दुष्प्रभाव नहीं होंगे?

नहीं, तब भी आपको दुष्प्रभाव हो सकते हैं

एक इंजेक्षन के बाद आपके शारीर में दवाई  से सप्ताहों तक रहती है, इसलिए आपको कोई महत्त्वपूर्ण दुष्प्रभाव होता है या नहीं इसकी जांच करने के लिए सबसे पहले गोलियाँ लेनी चाहिए आपके डॉक्टर इसका सबसे अच्छा सही अंदाजा लगा सकते हैं


मैं एंटी सायकोटिक दवाईयाँ लेना कब बंद कर सकती हूँ?

आपकी मनोदुर्दशा दीर्घकालिक है या अल्पकालिक है, इसपर ये निर्भर होता है इसका सही अंदाजा डॉक्टर लगा सकते है और ये व्यक्तिगत परिस्थिति पे निर्भर है